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गुनेहगार
कभी-भी
छत पे
क़ायम है
होठों पे
पे तुला
बेवफ़ा
पे तो
विश्वासवरुण
कंसारी
चौदहवीं का चांद
सच को स्वीकार नहीं करना हैं
सर पे
नहीं कोई काम
कंधे पर
जिंदगी
सुबह-सुबह
किताबीदुनिया
दिल में
मजदूरअपरिचित
Hindi
शिक्षकों पे
Quotes
शुक्रवार: शिक्षकों पे सदा भरोसा करना, कभी-भी निरादर नहीं करन ...
"मैंने तुझे पलकों पे रखा था पर उसने तुम मुझे दिल में भी जगह ...
मुझे किसी और कि ज़रूरत क्या है, जबकि मेरे संस्कार और माँ के ...
रविवार: मजदूर ने ताजमहल बनाया है, मजदूर ने पलंग पे सुलाया ह ...
मंगलवार: बचपन बड़ा सुहाना होता था, होठों पे हँसी कंधे पर बै ...
बुधवार: कहते हैं विश्वास पे तो, दुनिया सारी क़ायम है। प्या ...
शुक्रवार: चौदहवीं का चाँद मेरा, यार प्यार बेवफ़ा हुआ। गद्द ...
बुधवार: हमें करना नहीं कोई काम, सब लंबे समय से घर बैठे। सुबह ...
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